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Monday, May 11, 2020

कैसे घर वापस आयेंगे चिंता में घुले जा रहे थे प्रवासी मजदूर, छत्तीसगढ़ सरकार की स्पेशल ट्रेन से समस्या दूर हुई,


बिलासपुर दो माह से लॉकडाउन में फंसे मस्तूरी विकासखंड के ग्राम सरगवां के लाभो बघेल को यकीन नहीं आ रहा है कि वह इतनी आसानी से सफर तय कर बिलासपुर पहुंच चुका है और थोड़ी ही देर में गांव पहुंचकर अपनों के बीच होगा। आज ट्रेन से उतरे सभी श्रमिकों ने छत्तीसगढ़ सरकार का आभार माना और बिलासपुर जिला प्रशासन की व्यवस्था की सराहना की।
लाभो बघेल गुजरात में फंसे उन 1208 प्रवासी मजदूरों में से एक है जो छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई स्पेशल ट्रेन से आज अपने वापस घर लौट सका है। सुबह ट्रेन से उतरने पर लाभो, उसकी पत्नी तीन बच्चों और चार भाईयों के पूरे परिवार के चेहरे में खुशी एवं संतोष का भाव था। उन्होंने बताया कि कल शाम चार बजे अहमदाबाद से रवाना हुई इस ट्रेन में सभी को सामाजिक दूरी के साथ आरामदायक सीट दी गई थी और रास्ते में भोजन-पानी की व्यवस्था भी की गई थी। ट्रेन स्पेशल होने के कारण रास्ते में कहीं पर नहीं रुकी और वे बहुत कम समय से बिलासपुर पहुंच गये। ट्रेन के स्टेशन आने और स्टेशन से बस में बैठकर गांव जाने तक की बहुत अच्छी व्यवस्था प्रशासन ने की है। उसने कहा कि अब हम गांव पहुंच रहे हैं। कोरोना महामारी से बचाव के लिए हम सभी खुशी-खुशी निर्धारित समय तक गांवों के क्वारांटाइन सेंटर में रहेंगे।
इसी ट्रेन से जयरामनगर का विजय अपने माता-पिता व भाई के साथ उतरा। उसने बताया कि वे छह माह पहले गुजरात के वरसाड़ गये थे, लेकिन दो माह से लॉकडाउन के कारण वहां खाली बैठ गये थे। उन्हें गांव पहुंचने की चिंता थी क्योंकि अपनी थोड़ी जमीन में खेती की तैयारी भी करनी थी। उन्हें आने के लिए कोई साधन नहीं दिख रहा था। वे संशय में थे कि आगे चार माह किस तरह गुजारेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से ट्रेन की व्यवस्था होने से उनकी चिंता दूर हो गई। अब वह गांव में रहकर अपना परिवार संभालेगा।
मस्तूरी विकासखंड के ही ग्राम भिलई की मथुरा बाई अपने पति के साथ स्पेशल ट्रेन से आज वापस आई। उसने बताया कि यदि लॉकडाउन नहीं होता तो वह और उनके साथी श्रमिक दो माह पहले अपने घर आ चुके होते। अचानक सभी ट्रेन, बस बंद हो जाने पर वे चिंतित हो गये थे कि अब कैसे गांव लौटेंगे। इसी बीच उन्हें पता चला कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ट्रेन की व्यवस्था कर दी है । दो माह काम बंद हो जाने के कारण उन्हें खर्च चलाने में परेशानी होने लगी थी। अब गांव पहुंचकर खेती और मजदूरी का काम शुरू कर सकेंगे।

इसी तरह से -
तखतपुर विकासखंड के खजुरी की चमेली सतनामी, समडिल के सुमरित लाल खांडे, बिल्हा विकासखंड के ग्राम दुर्गडीह के राजप्रसाद निराला, फूलबाई निराला, प्रियंका निराला, ग्राम झाल के रामचंद्र बंजारे, हसीना कुमारी, बेलतरा के योगेश महिलांगे, हिर्री के संतोष कुर्रे, बिटकुली के देवलाल कुर्रे आदि श्रमिकों ने अपने गांव-घर पहुंचने पर खुशी जताई।

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