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Tuesday, April 14, 2020

बंद पड़ी दुकानों और सुनसान पड़ी चौराहो पर,दीदार करने से नहीं चूक रहे लोग.


बिलासपुर नमस्कार दोस्तों जैसे कि हम सभी जानते है कि,आज के समय मे पुरा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रही है। 15 लाख  से ज्यादा लोग पूरी दुनिया मे इसकी चपेट मे आ चुके है और आकड़े बतायें अनुसार लगभग 1 लाख 10 हज़ार से ज्यादा लोगों कि मौत हो चुकी है. इस भयावह का अंदाजा इसी से लागया जा सकता है कि इस वायरस ने पूरी दुनिया कि अर्थव्यवस्था को मंदी कि ओर धकेल दिया है.अर्थसास्त्रियो के अनुसार कोरोना वायरस के चलते इस बार कि मंदी 2008 मे आये मंदी से भी ज्यादा बड़ी हो सकती है। बहुतयात मात्रा मे लोगो को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।और कई देशो कि अर्थव्यवस्था मे प्रगति कि रफ़्तार धीमी पड़ जाएगी।इस मंदी से निपटने के लिए सभी देशो को 1से 2 वर्ष तक का समय लग सकता है। खैर देखने वाली बात यह होंगी कि आने वाले समय मे यह मंदी हमारे भारत देश पर कितना प्रभाव छोड़ती है. जहा तक बात करें कि भारत मे कोरोना कि तो, यह वायरस हमारे देश के 9000 से ज्यादा लोगो को अपनी संक्रमण से चपेट मे ले चूका है। यह संख्या दिन ब दिन बढ़ती भी जा रही है।मौत का आकड़ा भी सैकडों से ऊपर पहुंच  चूका है।और देश के सभी राज्यों मे कर्फ्यू जैसे हालत है,पर क्या केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा लगाया गया लॉक डाउन कारगर है?इसका उत्तर तो हर जगह अलग अलग देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है, सभी दुकाने बंद है परन्तु बात सब्जी मर्केट या राशन कि दुकानों की हो,तो ये जगह इन सबसे अपवाद है शुबह 7 से 12 बजे तक इन जगहों मे लोगो कि ऐसे लाईने लगी रहती है मानो कल के लिए कुछ मिलेगा ही नहीं, स्थानीय पुलिस-प्रशासन नगर निगम और सरकारी अमला सोशल डिस्टेन्स बनाने के लिए, लोगों को यह समझाते नहीं थक रहे कि यह कितनी गंभीर संक्रमण  जो एक दुसरे के संपर्क में आने से फैलता है। परन्तु आम लोगो को तो बस घरों से निकलने का थोड़ी सी एक मौका चाहिए,शहर में बंद पड़ी दुकानों और सुनसान पड़ी चौराहो पर दीदार करने से लोग  नहीं चूक रहे। आम जनता तो पुलिस-प्रशासन से मानो आँख मिचौली खेल रही है,जहां पुलिस कि गाड़ी आई सब ग्रुप में बैठे खड़े लोग घरों के अंदर,और पुलिस कि गाड़ी जाने के बाद सब फिर से बाहर, ऐसा लगता है,जैसे लोग कोरोना से ज्यादा तो पुलिस  से डर रहे कि मार ना पड़े या फिर थाना तो ना जाना पड़े, पर आम लोगो को यह सोंचना चाहिए,कि क्या यह सब वे अपने लिए क़र रहे है,,,,क्या इन सबके पीछे  उनका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ छिपा है ?,,,,,,नहीं यह सब तो हमारे लिए अपनी जान हथेली पर लेकर  हमारे व हमारे परिवार और देश हित के लिए सब कर रहें,ताकि हम सबको सुरक्षित रखा जा सके"एक ऐसे शत्रु से जो कि अदृश्य है" ये कब कहाँ आ जाये किस व्यक्ति को कब अपनी चपेट मे ले ले,,, यह कोई नहीं जान पाता परन्तु आज के समय मे मानव प्रवित्ति ऐसा हो गया है कि, जानबुझ क़र भूल करते हैं।सोंचना यह है कि हमें जानबूझकर किया इस भूल कि कीमत कौन चुकाएगा। ये योद्धा आपकी सेवा मे हमेसा डटे है,अगर आप इस वायरस कि चपेट मे आएंगे तो सबसे पहले किसकी जान को खतरा है हमारे परिवार को या दुसरो को ये लुका छुपी के खेल से कौन प्रभावित होगा हम या प्रशासन घरों मे रह क़र हम किसकी जान बचा रहे अपनी या प्रशासन कि मानव जात सवार्थी तो होता हि है तो, कम से कम अपने ही स्वार्थ के लिए घरों में रहें,गली मोहल्लो मे इस प्रकार उठना बैठना या टहलना कहा तक जायज है कृपया 2 मिनट बैठ क़र सोचे कि ऐसा करने से हमें क्या मिल रहा हम बस अपने परिवार समाज ओर सबसे पहले खुद को मुसीबत मे डाल रहे। इसी शब्दों के साथ आज का लेख समाप्त करने से पहले महान चाणक्य कि एक नीति याद आ गई, कि
अगर शत्रु अदृश्य हो तो हमें छुप जाना ही समझदारी है.
अतः आप सबसे निवेदन है कि बिना मतलब के घर के बाहर गलियों मे सड़को मे बाजारों मे ना घूमें अपने लिए ना सही अपने परिवार बच्चों और देश व समाज के लिए नियमों कर पालन करे धन्यवाद।

                            संपादकीय लेख प्रकाश दुबे 

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